Course Name : Pearl Farming
Course Duration: 3 Days Registration Fee:2100/-
Course Fee:10000/- Hostel & Food Fee:5000/-
ट्रेनिंग लो और घर बैठे उगाओ मोती
मोती की खेती कैसे करें
मोती की खेती के लिए सबसे अनुकूल मौसम शरद ऋतु का समय है यानी अक्टूबर से दिसंबर। मोतियों की खेती कम से कम 10 x 10 फीट या उससे बड़े तालाब में की जा सकती है। मोती की खेती के लिए 0.4 हेक्टेयर जैसे छोटे तालाब में अधिकतम 25000 सीपों से मोती का उत्पादन किया जा सकता है। खेती शुरू करने के लिए किसान को तालाब, नदी आदि से सीप इकट्ठा करने पड़ते हैं या फिर इन्हें खरीदा भी जा सकता है।
तीन प्रकार के होते हैं मोती

केवीटी- सीप के अंदर ऑपरेशन के जरिए फारेन बॉडी डालकर मोती तैयार किया जाता है। इसका इस्तेमाल अंगूठी और लॉकेट बनाने में होता है। चमकदार होने के कारण एक मोती की कीमत हजारों रुपए में होती है।
गोनट- इसमें प्राकृतिक रूप से गोल आकार का मोती तैयार होता है। मोती चमकदार व सुंदर होता है। एक मोती की कीमत आकार व चमक के अनुसार 1 हजार से 20 हजार तक होती है।


प्राकृतिक और कृत्रिम में है ये अंतर
दरअसल, सीप में मोती का निर्माण तभी शुरू होता है, जब कोई बाह्य पदार्थ इसके अंदर प्रवेश कर जाए। सीप इसके प्रतिकार स्वरूप एक द्रव का स्नाव करता है। यही द्रव उस बाह्य कण के ऊपर जमा होता रहता है। अंत में यह मोती का रूप ले लेता है। मोती बनने के इस रहस्य का पता भारतीय मनीषियों को बहुत पहले से था। दरअसल, स्वाति नक्षत्र यानी शरद ऋतु में मीठे पानी में पैदा होने वाला सीप ठंड पाकर थोड़ा खुल जाता है। ऐसे में वर्षा जल या बाह्य कण इसमें प्रवेश कर जाए तो मोती बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। 13वीं सदी में चीन में मोती की खेती शुरू होने के प्रमाण मिलते हैं।



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