Thursday, July 22, 2021

Mushroom Master Trainers Training Programme

Course Name : 

Mushroom Master Trainers Training Programme

Course Duration: 30 Days                     

Registration Fee:2100/-

Course Fee:50,000/- 

Hostel & Food Fee:10,000/-

Button/Milky /Oyster/Medicinal Mushroom Cultivation and Processing Technology

Course Name : Button Mushroom Cultivation and Processing Technology

Course Name : Milky Mushroom Cultivation and Processing Technology

Course Name : Oyster Mushroom Cultivation and Processing Technology

Course Name : Medicinal Mushroom Cultivation and Processing Technology

Course Duration: 1 Day                                    Registration Fee:1100/-
Course Fee:1000/-                                              Hostel & Food Fee:1000/-



Wednesday, July 21, 2021

Button Mushroom Compost Production

Course Name : Button Mushroom Compost Production

Course Duration: 7 Days                                  Registration Fee:1100/-
Course Fee:5000/-                                              Hostel & Food Fee:5000/-


बटन मशरूम कम्पोस्ट

कम्पोस्ट निर्माण की सामग्री:-
  • गेहूँ या चावल का भूसा
  • अमोनियम सल्फेट या कैल्शियम 
  • अमोनियम नाइट्रेट
  • सुपर फास्फेट 
  • यूरिया 
  • गेहूँ का चौकर 
  • जिप्सम, आदि|
कम्पोस्ट बनाने की विधि :-

1. लम्बी विधि

सूत्र संख्या 1-
गेहूँ या चावल का भूसा- 1000 किलोग्राम, अमोनियम सल्फेट या कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट- 30 किलोग्राम, सुपर फास्फेट- 10 किलोग्राम, यूरिया- 17 किलोग्राम, गेहूँ का चौकर- 100 किलोग्राम और जिप्सम- 36 किलोग्राम आदि|

सूत्र संख्या 2- गेहूँ या चावल का भूसा- 1000 किलोग्राम, गेहूँ का चापड- 100 किलोग्राम, सुपर फास्फेट-10 किलोग्राम, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट सल्फेट 206 प्रतिशत के साथ- 27 किलोग्राम, जिप्सम- 100 किलोग्राम, यूरिया 46 प्रतिशत नाइट्रोजन के साथ- 13 किलोग्राम, सल्फेट या म्यूरेट ऑफ पोटाश-10 किलोग्राम, नेमागान 60 प्रतिशत के साथ- 135 मिलीलीटर और नोलासेस- 175 लीटर आदि|

सूत्र संख्या 3- गेहूँ या चावल का भूसा- 1000 किलोग्राम, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट- 30 किलोग्राम, यूरिया- 132 किलोग्राम, गेहूँ का चौकर- 50 किलोग्राम, जिप्सम- 66 किलोग्राम, लिण्डेन 10 प्रतिशत के साथ- 500 ग्राम आदि|

2. छोटी /अल्प विधि द्वारा

सूत्र संख्या 1-
गेहूँ या चावल का भूसा- 1000 किलोग्राम, गेहूँ का चौकर- 50 किलोग्राम, मुर्गी की खाद- 40 किलोग्राम, यूरिया- 180 किलोग्राम, जिप्सम- 70 किलोग्राम, लिन्डेन डस्ट- 1 किलोग्राम आदि|

सूत्र संख्या 2- गेहूँ या चावल का भूसा- 1000 किलोग्राम, मुर्गी की खाद- 400 किलोग्राम, चावल का चौकर 67 किलोग्राम, बुरवर के दाने- 74 किलोग्राम, यूरिया- 20 किलोग्राम, कपास के बीज का चौकर- 17 किलोग्राम, जिप्सम- 34 किलोग्राम आदि|

सूत्र संख्या 3- गेहूँ या चावल का भूसा- 1000 किलोग्राम, मुर्गी की खाद- 400 किलोग्राम, ब्रुवर के दाने- 72 किलोग्राम, यूरिया- 14.5 किलोग्राम, जिप्सम 30 किलोग्राम आदि|

अच्छे कम्पोस्ट की पहचान

केसिंग मिश्रण तैयार करना


Mushroom Product (मशरूम के उत्पाद) Development

Course Name : Mushroom Product Development

Course Duration: 7 Days                                        Registration Fee:1100/-
Course Fee:5000/-                                                    Hostel & Food Fee:5000/-

मशरूम के उत्पाद



  • मशरूम बडी़: 
  • मशरूम पापड़: 
  • मशरूम के व्यंजन 
  • मशरूम आटा:
  • मशरूम से शिशु आहार 
  • भुजिया
  • Biscuit 
  • Mini Samosa
  • Mushroom Namkeen


ताजे मशरूम के स्वादिष्ट व्यंजन
  • मशरूम पकौडा
  • मशरूम पराठा
  • भरवां मशरूम शिमला मिर्च
  • मशरूम का आचार
सूखे हुए मशरुम बड़े जायकेदार होते है, बहुत सारे व्यंजनों में एक स्वादिष्ट सामाग्री की तरह इस्तेमाल किये जाते है और इन्हें बहुत लम्बे समय तक इस्तेमाल कर सकते है, यानी कि ये जल्दी से खराब भी नहीं होते है। इन्हें पानी आदि तरल में डाल कर फिर से नम कर सकते है, और फिर इन्हें कई व्यंजनों में इस्तेमाल कर सकते है।

Mushroom Spawn (मशरूम स्पॉन /बीज)Production Technology

Course Name : Mushroom Spawn Production Technology

Course Duration: 3 Days                                       Registration Fee:1100/-
Course Fee:10,000/-                                                Hostel & Food Fee:5000/-


घर और खेत में मशरूम स्पॉन (बीज) उत्पादन


Procedure of Mushroom Spawn Production

Wheat grains
Caco3
Mother Culture of Mushroom
Agar agar
Inoculation Pin
Polythene bags or Bottles
Cotton
Rubber band


Required Machines




Laminar Air flow

Autoclave/Pressure Cooker


मशरूम स्पॉन (बीज) उत्पादन तकनीक को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है:

1. शुद्ध कवक जाल संवर्धन बनाना ।

2. शुद्ध संवर्धन से मातृ मास्टर संवर्धन बनाना ।

3. मास्टर संवर्धन से बीजाई के लिए बीज बहुगुणन ।

मास्टर/मदर  स्पॉन (बीज) से शिशु स्पान बनाना:

खुंभी की खेती के लिए शिशु स्पान ही वास्तव में बोने का पदार्थ है और अगेरिकस और प्लूरोटस उगाने वाले किसान मास्टर स्पान को सीधे ही क्रियाधार वाले शैलों में बोने के काम में ले आते हैं ।

जैसे मास्टर/मदर स्पान तैयार किया जाता है उसी विधि से शिशु स्पान को तैयार करते हैं । एक बोतल मास्टर बीज से 20-30 पोलीप्रोपाइलीन की थैलियों को निवेशित करते हैं । निवेशित थैलियों को 250 सेन्टीग्रेट ताप पर ऊष्मायित्र में 2-3 सप्ताह के लिए रखा जाता है । ये बोतलें खाद में बीजाई के लिए उपयोग में लाई जा सकती है ।

Tuesday, July 20, 2021

Honey Bee Farming

Yoga and Naturopathy

Digital Marketing

Candle (Mombatti) Making Training

Agarbatti Making Training

Diploma in Computer Application

Advance Diploma in Computer Application

Vermi Compost

Pearl Farming ( मोती की खेती )


Course Name : Pearl Farming

Course Duration: 3 Days                                        Registration Fee:2100/-
Course Fee:10000/-                                                  Hostel & Food Fee:5000/-

 

ट्रेनिंग लो और घर बैठे उगाओ मोती

 

मोती की खेती कैसे करें            

मोती की खेती के लिए सबसे अनुकूल मौसम शरद ऋतु का समय है यानी अक्टूबर से दिसंबर। मोतियों की खेती कम से कम 10 x 10 फीट या उससे बड़े तालाब में की जा सकती है। मोती की खेती के लिए 0.4 हेक्टेयर जैसे छोटे तालाब में अधिकतम 25000 सीपों से मोती का उत्पादन किया जा सकता है। खेती शुरू करने के लिए किसान को तालाब, नदी आदि से सीप इकट्ठा करने पड़ते हैं या फिर इन्हें खरीदा भी जा सकता है।

तीन प्रकार के होते हैं मोती



केवीटी- सीप के अंदर ऑपरेशन के जरिए फारेन बॉडी डालकर मोती तैयार किया जाता है। इसका इस्तेमाल अंगूठी और लॉकेट बनाने में होता है। चमकदार होने के कारण एक मोती की कीमत हजारों रुपए में होती है।




गोनट
- इसमें प्राकृतिक रूप से गोल आकार का मोती तैयार होता है। मोती चमकदार व सुंदर होता है। एक मोती की कीमत आकार व चमक के अनुसार 1 हजार से 20 हजार तक होती है।








मेंटलटीसू- इसमें सीप के अंदर सीप की बॉडी का हिस्सा ही डाला जाता है। इस मोती का उपयोग खाने के पदार्थों जैसे मोती भस्म, च्यवनप्राश व टॉनिक बनाने में होता है। बाजार में इसकी सबसे ज्यादा मांग है।




प्राकृतिक और कृत्रिम में है ये अंतर

दरअसल, सीप में मोती का निर्माण तभी शुरू होता है, जब कोई बाह्य पदार्थ इसके अंदर प्रवेश कर जाए। सीप इसके प्रतिकार स्वरूप एक द्रव का स्नाव करता है। यही द्रव उस बाह्य कण के ऊपर जमा होता रहता है। अंत में यह मोती का रूप ले लेता है। मोती बनने के इस रहस्य का पता भारतीय मनीषियों को बहुत पहले से था। दरअसल, स्वाति नक्षत्र यानी शरद ऋतु में मीठे पानी में पैदा होने वाला सीप ठंड पाकर थोड़ा खुल जाता है। ऐसे में वर्षा जल या बाह्य कण इसमें प्रवेश कर जाए तो मोती बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। 13वीं सदी में चीन में मोती की खेती शुरू होने के प्रमाण मिलते हैं।




Mushroom Master Trainers Training Programme

Course Name :  Mushroom Master Trainers Training Programme Course Duration: 30 Days                      Registration Fee:2100/- Course Fee:...